Home news इथेनॉल मिले पेट्रोल के फायदे जानिए, गाड़ियों में माइलेज ज्यादा और धुआं कम, किसानों की भी आमदनी बढ़ी | Ethanol mixed petrol helps sugarcane farmer car and bike mileage increased with less pollution

इथेनॉल मिले पेट्रोल के फायदे जानिए, गाड़ियों में माइलेज ज्यादा और धुआं कम, किसानों की भी आमदनी बढ़ी | Ethanol mixed petrol helps sugarcane farmer car and bike mileage increased with less pollution

by Vertika


गन्ना किसान ने भारत पेट्रोलियम को बताया, गन्ने के पेमेंट में पहले दिक्कत आती थी. लेकिन अब चीनी मिलों ने गन्ने से इथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है. उस इथेनॉल को सरकार खरीद लेती है और वह पेट्रोलियम में चला जाता है.

पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग शुरू (सांकेतिक तस्वीप)

पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग (मिलावट) शुरू कर दी गई है. अभी यह मात्रा बहुत कम है लेकिन धीरे-धीरे इसे बढ़ाया जाएगा. इथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल के बारे में खरीदारी की अच्छी प्रतिक्रिया आ रही है. लखनऊ के एक बाइक सवार ने बताया कि इथेनॉल मिक्स होने से गाड़ी में कोई दिक्कत नहीं है और उनकी बाइक पहले से ज्यादा हल्की (स्मूद smooth) चल रही है. बाइक सवार के मुताबिक, गाड़ी पहले की अपेक्षा धुआं (प्रदूषण) भी कम दे रही है. लखनऊ में तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम ने इथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल के बारे में लोगों से प्रतिक्रिया ली है, जिस पर पट्रोल के खरीदारों ने अपनी टिप्पणी की है.

इथेनॉल मिक्सिंग को लेकर सरकार बड़ी तैयारी में लगी है और आने वाले समय में इसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल के आयात को कम करना है. भारत अभी दुनिया में पहला ऐसा देश है जो सबसे ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी का असर देसी बाजार पर देखा जाता है. जैसा कि अभी चल रहा है. कोरोना काल में तेलों की मांग कम होने के बावजूद कई शहरों में तेल के दाम 100 रुपये के पार हो गए हैं. पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई अंतर नहीं रह गया है. इससे पार पाने के लिए सरकार ने देश में इथेनॉल के निर्माण में तेजी लाने का फैसला किया है. अभी मक्का और चावल से इथेनॉल बनाया जा रहा है. कुछ हद तक फसलों के अवशेष से भी इथेनॉल बनाया जा रहा है.

भारत पेट्रोलियम का प्रयास

पट्रोल में इथेनॉल के निर्माण और ब्लेडिंग को लेकर भारत पेट्रोलियम के जनरल मैनेजर (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) भारत नेवालकर ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति होगी, साथ में मांग के लिए विदेशों पर निर्भरता कम होगी. प्रदूषण को घटाने में भी बड़ी सफलता मिलेगी. इससे कृषि की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी क्योंकि इथेनॉल निर्माण पूरी तरह से कृषि उत्पादों की बदौलत ही हो पाएगी. जिन कृषि उत्पादों का खाने में इस्तेमाल नहीं होगा या अवशेष बचेंगे, उनसे इथेनॉल बनेगा. इन उत्पादों को किसान आसानी से सरकार या डिस्टीलरी को बेच सकेंगे. गन्ने से भी इथेनॉल बनाने का काम चल रहा है जिससे किसानों को बहुत लाभ मिल रहा है.

क्या कहा किसान ने

यूपी के हरदोई जिले के किसान मोहम्मद जफर नियाज ने भारत पेट्रोलियम से गन्ने की खेती और इथेनॉल निर्माण में सहयोग के बारे में बताया. नियाज का कहना है कि पहले गन्ने की खेती में कई बाधाएं आती थीं, पारंपरिक तरीके से खेती करने से लाभ भी कम मिलता था. मेहनत ज्यादा और कमाई कम होती थी. बाद में चीनी मिलों के प्रयास और सुझाव पर वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती शुरू की. आज की तारीख में गन्ने बोने का तरीका पूरी तरह बदल गया है. ड्रिप सिंचाई के माध्यम से 40-50 परसेंट तक पानी की बचत हो रही है. इससे लागत में कमी आई है और उत्पादन डेढ़ गुना तक बढ़ गया है.

गन्ना किसानों को फायदा

गन्ना किसान ने भारत पेट्रोलियम को बताया, गन्ने के पेमेंट में पहले दिक्कत आती थी. लेकिन अब चीनी मिलों ने गन्ने से इथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है. उस इथेनॉल को सरकार खरीद लेती है और वह पेट्रोलियम में चला जाता है. इथेनॉल का पैसा तुरंत चीनी मिलों को मिल जाता है और उसी पेमेंट के आधार पर चीनी मिलें गन्ना किसानों को पैसा दे देती हैं. अब किसान गन्ने की खेती को लेकर और ज्यादा प्रोत्साहित हो रहे हैं क्योंकि इससे इथेनॉल का निर्माण बढ़ गया है. भारत पेट्रोलियम ने देश के लगभग हर हिस्से में इथेनॉल मिले पेट्रोल की बिक्री शुरू कर दी है जिसके बारे में लोगों की प्रतिक्रिया अच्छी है. कार चालकों का भी कहना है कि गाड़ी हल्की चल रही है और प्रदूषण भी कम हुआ है. कार चालकों को पहले की तुलना में अच्छी माइलेज मिल रही है.

क्या कर रही है सरकार

अभी सरकार न केवल गुड़ से बल्कि मक्का और चावल जैसे अनाज से भी इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. इस साल सरकार ने इथेनॉल बनाने के लिए 78,000 टन एफसीआई के चावल आवंटित किए हैं. इनमें से चार राज्यों पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश की आठ डिस्टलरी ने एफसीआई के 66,000 टन चावल के लिए एग्रीमेंट किया है, जिससे तीन करोड़ लीटर इथेनॉल का निर्माण किया जाएगा. हालांकि इथेनॉल उत्पादन में चावल का इस्तेमाल बहुत ही कम होगा. सरकार अनाज पर चलने वाली डिस्टलरी के निर्माण को बढ़ावा दे रही है ताकि शराब की डिस्टीलरी पर निर्भरता को कम किया जा सके. अनाज आधारित डिस्टीलरी ज्यादा बनने के बाद इथेनॉल का निर्माण और तेजी से बढ़ेगा.

सरकार ने अगले दो साल में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है जिससे देश को महंगे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. इससे पहले सरकार ने 2025 तक इसे हासिल करने का लक्ष्य रखा था जिसे अब और नजदीक करते हुए 2023 कर दिया गया है. पिछले साल सरकार ने 2022 तक के लिए पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग (10 प्रतिशत इथेनॉल को 90 प्रतिशत पेट्रोल के साथ मिलाना), उसके बाद एथनॉल मिलाने की मात्रा को 2030 तक बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा था. इस साल की शुरुआत में इसे 2030 के बजाय 2025 कर दिया गया था और अब इसमें और सुधार करते हुए इसे अप्रैल 2023 कर दिया गया.

ये भी पढ़ें: अगर आपका भी है SBI में जनधन बैंक खाता तो सेविंग अकाउंट में ऐसे कर सकते हैं ट्रांसफर, ये रहा प्रोसेस



You may also like

Leave a Comment