Home news बिटकॉइन में गिरावट की असली वजह जानिए, दिक्कत मार्केट में नहीं, माइनिंग के नेटवर्क में है | Bitcoin mining difficulty on blockchain result in drop of bitcoin price

बिटकॉइन में गिरावट की असली वजह जानिए, दिक्कत मार्केट में नहीं, माइनिंग के नेटवर्क में है | Bitcoin mining difficulty on blockchain result in drop of bitcoin price

by Vertika


जैसे-जैसे बिटकॉइन की मांग होती है, वैसे-वैसे बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर ब्लॉक जोड़े जाते हैं. यह काम लगातार चलता रहता है. हर 10 मिनट पर एक ब्लॉक जोड़ दिया जाता है. बिटकॉइन के ब्लॉकचेन पर ब्लॉक टाइम यह बताता है कि कोई नया ब्लॉक बनाने में कितना वक्त लग रहा है.

बिटकॉइन की ट्रेडिंग कैसे करें, कैसे कमा सकते हैं अच्छा मुनाफा (सांकेतिक तस्वीर)

बिटकॉइन में गिरावट का दौर जारी है. इसकी वजह मार्केट में नहीं बल्कि ब्लॉकचेन में बताई जा रही है. फिलहाल बिटकॉइन अब तक की सबसे बड़ी माइनिंग दिक्कतों से जूझ रहा है. चीन दुनिया के 70 परसेंट बिटकॉइन की माइनिंग का काम करता है, वहां इस पर पाबंदी लगने के बाद बिटकॉइन की हालत खस्ता हो गई है. इससे नेटवर्क के ऑटोमेटिक स्टेबलाइजिंक पर भारी असर पड़ा है. चीन ने अपने कई प्रांतों में बिटकॉइन की माइनिंग पर बेदह कड़े प्रतिबंध लगाए हैं जिसके बाद कीमतों में और भी गिरावट देखी जा रही है.

चीन की पाबंदी के चलते क्रिप्टो इंडस्ट्री को बहुत आघात पहुंचा है जिसका असर चीन समेत दुनिया के सभी क्रिप्टो बाजार में देखा जा रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिटकॉइन की माइनिंग 28 परसेंट तक गिर गई है. यह लगातार तीसरी बार है जिसमें बिटकॉइन की माइनिंग इतनी तेजी से गिरी है. पहली बार माइनिंग में गिरावट का ट्रेंड दिसंबर 201 में देखा गया था. इस साल 29 मई और 13 जून को कुछ ऐसी ही हालत दिखी. हालांकि इस साल गिरावट 16 परसेंट और 5 परसेंट की रही. इसकी जानकारी माइनिंग सर्विस प्रोवाइडर BTC.com ने दी है.

बिटकॉइन की माइनिंग में क्या है दिक्कत

बिटकॉइन में दिक्कत का पता उसके इंटरनल स्कोर से लगाया जाता है. इस स्कोर की शुरुआत 1 से होती है. यह वही स्कोर है जिसे बिटकॉइन के सूत्रधार सतोशी ने शुरुआती माइनिंग में तय किया था. बिटकॉइन की माइनिंग को घटाने या बढ़ाने के लिए प्रोग्रामिंग की जाती है. बिटकॉइन की माइनिंग घटानी है या बढ़ानी है, यह उसके नेटवर्क पर माइनिंग करने वाले लोगों की तादाद पर निर्भर करता है. अभी बिटकॉइन की माइनिंग का स्कोर 14,363,025,673,659 पर चल रहा है. इससे ठीक पहले यह स्कोर 19,932,791,027,282 पर था. स्कोर घटने का असर बिटकॉइन की कीमतों पर भी दिख रहा है.

ब्लॉक में ऐसे जुड़ता है बिटकॉइन

जैसे-जैसे बिटकॉइन की मांग होती है, वैसे-वैसे बिटकॉइन ब्लॉकचेन पर ब्लॉक जोड़े जाते हैं. यह काम लगातार चलता रहता है. हर 10 मिनट पर एक ब्लॉक जोड़ दिया जाता है. बिटकॉइन के ब्लॉकचेन पर ब्लॉक टाइम यह बताता है कि कोई नया ब्लॉक बनाने में कितना वक्त लग रहा है. यह ब्लॉक टाइम अलग-अलग हो सकता है क्योंकि यह किसी नेटवर्क पर काम करने वाले माइनर की संख्या पर निर्भर करता है. माइनर के कंप्यूटर की स्पीड कितनी है, ब्लॉक टाइम इस पर भी निर्भर करता है.

कैसे काम करते हैं माइनर

मान लीजिए किसी नेटवर्क पर एक साथ कई माइनर बिटकॉइन की माइनिंग में लगे हों और वे सभी किसी अगले ब्लॉक की तेजी में काम कर रहे हों, तो ब्लॉक टाइम या बिटकॉइन की माइनिंग का समय कम हो जाएगा. यानी कि कम समय में ज्यादा माइनिंग होगी. माइनर अकसर बिटकॉइन की दुनिया में चलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट 6.125 BTC के लिए जो लगाते हैं. अगर माइनर को यह रिवॉर्ड मिल जाए तो उसे भरपूर कमाई होती है. अगर किसी नेटवर्क पर माइनर कम हों या वे छोड़ कर दूसरे नेटवर्क पर चले गए हों तो माइनिंग का ब्लॉक टाइम बढ़ जाता है.

माइनिंग में परेशानी

बिटकॉइन के अलगोरिदम में सेल्फ एडजस्ट प्रोग्राम लगा है जो बिटकॉइन की गिरावट को थामता है. अगर बिटकॉइन की माइनिंग का डिफिकल्टी लेवल 2,016 ब्लॉक पर चला जाए, जैसा कि हर दो हफ्ते पर देखा जाता है, या ब्लॉक टाइम 10 मिनट पर चला जाए तो अलगोरिदम उसे ठीक कर लेता है. अभी मामला कुछ परेशानी वाला दिख रहा है. बिटकॉइन का एडजस्टमेंट लेवल 10 मिनट का है लेकिन अभी इसका स्तर 23 मिनट पर चला गया है. यह रिकॉर्ड 27 जून का है. बताया जा रहा है कि उसके बाद माइनिंग में कुछ तेजी आई है लेकिन अभी सुधरने में काफी वक्त लगेगा.

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