Home news Income Tax Return में ‘ऑटो पॉपुलेटेड’ सिस्टम क्या है, घंटों का काम अब मिनटों में ऐसे निपटेगा | What is auto populated system in income tax return file know its benefits

Income Tax Return में ‘ऑटो पॉपुलेटेड’ सिस्टम क्या है, घंटों का काम अब मिनटों में ऐसे निपटेगा | What is auto populated system in income tax return file know its benefits

by Vertika


Income tax return: अब तो मोबाइल ऐप के जरिये भी टैक्स की गणना की जाने लगी है. इस ऐप में टैक्सपेयर को अपनी जानकारी भरनी होती है. इसके बाद ऐप ही बताने लगता है कि करदाता की इनकम पर कितने टैक्स की देनदारी बनती है.

इनकम टैक्स फाइलिंग (सांकेतिक तस्वीर)

इनकम टैक्स रिटर्न (income tax return) फाइल करने की तारीख धीरे-धीरे अपने अंतिम पड़ाव की ओर सरक रही है. कोरोना में आयकरदाताओं को कोई तकलीफ न हो, इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी कि CBDT ने तारीख आगे बढ़ा दी है. इस बढ़ोतरी में वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 को शामिल किया गया है. नई तारीख के मुताबिक अब कोई व्यक्ति 30 सितंबर तक इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है. इसी के साथ सीबीडीटी ने कंपनियों के लिए कर्मचारियों को जारी किए जाने वाले फॉर्म-16 की मियाद भी एक महीने के लिए बढ़ा दी है. करदाताओं को इस बार एक नई सुविधा मिलने जा रही है जिसका नाम है ऑटो पॉपुलेटेड सिस्टम.

यहां ऑटो पॉपुलेटेड का अर्थ है सभी डेटा का ऑटोमेटिक तौर पर अपने आप एक साथ आ जाना. अलग-अलग सोर्स से सभी जरूरी डेटा एक प्लेटफॉर्म पर एकत्रित हो जाते हैं और इसके लिए हमें अलग से कुछ नहीं करना होता है. बस एक बटन दबाना होता है. दरअसल, इस बार के इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR file) में यही सिस्टम लागू हुआ है.

मान लीजिए किसी टैक्सपेयर की कुछ जानकारी उसकी कंपनी के पास है, कुछ जानकारी सीबीडीटी के पास है, कुछ जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास है और कुछ व्यक्तिगत सूचनाएं जो पैन या आधार में दर्ज हैं, तो ये सभी जानकारियां कुछ मिनटों में एक साथ आ जाएंगी. करदाता को ये जानकारियां अब अपने से जुटा कर इनकम टैक्स फाइलिंग में नही देनी होगी. ऑटो पॉपुलेटेड सिस्टम ये सभी जानकारी कुछ मिनटों में अपने से एकत्रित कर लेगा. इससे आईटीआर का घंटों का काम कुछ मिनटों में निपट जाएगा.

इन सुविधाओं से काम हुआ आसान

इस नए सिस्टम में टैक्यपेयर की व्यक्तिगत जानकारियां जैसे एंटिजन नंबर या घर का पता आदि, वह अपने आप इनकम टैक्स रिटर्न में एड होकर आएगा और करदाता को उसे भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह सुविधा अपने आप में काफी अहम साबित होने जा रही है. पहले ये सब जानकारी एकसाथ जुटाने में काफी मशक्कत करनी होती थी. इस क्रम में कुछ ऐलान और भी हुए हैं.

अब कंपनियों की ओर से ज्यादा मोहलत लेकर कर्मचारियों के लिए फॉर्म-16 (form 16) जारी किया जाएगा. इस फॉर्म में कंपनी कर्मचारी की सैलरी और टैक्स कटौती के बारे में बताती है. इनकम टैक्स रिटर्न में इस फॉर्म को सबसे अहम हिस्सा माना जाता है. इसकी अवधि बढ़ाकर 15 जुलाई कर दी गई है. फॉर्म-16 मिलने के बाद कर्मचारी और व्यक्तिगत तौर पर भी कोई टैक्सपेयर आसानी से अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है.

मोबाइल ऐप ने काम किया आसान

अब तो मोबाइल ऐप के जरिये भी टैक्स की गणना की जाने लगी है. इस ऐप में टैक्सपेयर को अपनी जानकारी भरनी होती है. इसके बाद ऐप ही बताने लगता है कि करदाता की इनकम पर कितने टैक्स की देनदारी बनती है. जिस तारीख को टैक्सपेयर ने अपना इनकम टैक्स चुकाया है, उसे भरने के बाद उस निश्चित तारीख तक कोई ब्याज बनता है तो मोबाइल ऐप इसे गणना करने के बाद बता देता है. इसके लिए अब अलग से टैक्स या ब्याज जोड़ने की जरूरत नहीं है जिसमें गलती होने की आशंका ज्यादा होती है.

सहेज कर रखें ये दस्तावेज

इसके लिए सबसे जरूरी दस्तावेज फॉर्म-16 है. अगर कोई कर्मचारी किसी कंपनी में काम करता है तो उसे काम के बदले सैलरी मिलती है. कंपनी इस सैलरी पर टैक्स काटती है और सारा हिसाब लगाने के बाद कर्मचारी को फॉर्म-16 (form 16) पकड़ा देती है. ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न भरने चलें तो अपने पास यह फॉर्म-16 जरूर रखें. आईटीआर में आपको सैलरी, उस पर कंपनी की ओर से डिडक्शन और जो टैक्स चुकाए गए हैं, इसकी जानकारी देनी होती है. इनकम टैक्स रिटर्न (income tax return) में जो जानकारी दे रहे हैं, ध्यान रखें कि वही जानकारी फॉर्म-16 में होनी चाहिए. इसमें अंतर होने पर नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है.

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