Home news PM-FME Scheme: खानपान का कारोबार करेंगे? 10 हजार करोड़ ₹ के फंड से आपको 10 लाख रुपये देगी सरकार, ऐसे करें आवेदन | Govt gives 10 Lakh Rupees for food processing industry in pmfme scheme know how to apply for Micro Food Processing Enterprises Scheme

PM-FME Scheme: खानपान का कारोबार करेंगे? 10 हजार करोड़ ₹ के फंड से आपको 10 लाख रुपये देगी सरकार, ऐसे करें आवेदन | Govt gives 10 Lakh Rupees for food processing industry in pmfme scheme know how to apply for Micro Food Processing Enterprises Scheme

by Vertika

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PMFME Scheme: हर जिले में रिसोर्स पर्सन बनाए गए हैं, जो यूनिट्स के लिए डीपीआर तैयार करते हैं. साथ ही बैंक से लोन लेने, FSSAI स्टैंडर्ड को पूरा करने और रजिस्ट्रेशन कराने के बारे में सभी जानकारी आप इनसे ले सकते हैं.

PMFME Scheme: इस योजना के तहत 10 लाख रुपये दे रही सरकार

(PM Formalization of Micro Food Processing Enterprises Scheme): कोरोना महामारी ने दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है. देश में भी छोटे कारोबारी से लेकर बड़े काराबारियों तक… लाखों लोग आर्थिक तौर पर परेशान हुए. इससे उबरने के लिए केंद्र सरकार कई तरह की योजनाओं के जरिये लोगों को सहारा दे रही है. इन्हीं योजनाओं में से एक है- पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज योजना (PMFME Scheme). इसके बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है.

स्कीम के नाम से तो आप समझ ही गए होंगे कि यह फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़ी स्कीम है. जो लोग फूड इंडस्ट्री में अपना काम शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सरकार मदद के तौर पर मोटा पैसा देती है. सरकार की मदद से लोग घर बैठे अपना काम शुरू कर सकते हैं. हाल ही में लोकसभा में केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने खाने-पीने का कारोबार करने वाले लोगों के लिए चलाई जा रही इस नई स्कीम के बारे में बताया था. इस स्कीम के लिए सरकार ने 5 वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की मदद का प्लान बनाया है.

35 हजार करोड़ ₹ का निवेश, 9 लाख लोगों को रोजगार

मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज की ओर से यह स्कीम आगे बढ़ाई गई है. इसके तहत प्रोसेसिंग सुविधा, प्रयोगशाला, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग और इनक्यूबेशन सेंटर समेत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए छोटी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री 35 प्रतिशत क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी का फायदा ले सकती हैं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह योजना इसलिए शुरू की गई थी ताकि छोटे कारोबार करने वाले लोग इसे अपना सकें और अपना काम बढ़ा सकें. सरकार इसको लेकर आश्वस्त है कि इस स्कीम के जरिये अर्थव्यवस्था में 35 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और 9 लाख रोजगार पैदा होंगे.

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट तय करेंगे राज्य

मंत्रालय के अनुसार, राज्यों की ये जिम्मेदारी होगी कि वे कच्चे माल की उपलब्धता का ध्यान रखते हुए हर जिले के लिए एक खाद्य उत्पाद की पहचान करें. इन उत्पादों की सूची में आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, कीनू, भुजिया, पेठा, पापड़, अचार, बाजरा आधारित उत्पाद, मछली पालन, मुर्गी पालन, मांस के साथ-साथ पशु चारा भी शामिल है. वन डिस्टिक वन प्रॉडक्ट के आधार पर चुने गए उत्पादों का प्रोडक्शन करने वाले उद्योगों को प्राथमिक्ता के आधार पर मदद दी जागी. जैसे कि जिस जिले में मक्के की बंपर उपज है, वहां कुरमुरे, पॉपकॉर्न.. जैसे उत्पादों की यूनिट लगाई जा सकेगी.

मिलेगी 10 लाख रुपये तक की मदद

मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, किसी प्रॉडक्टशन यूनिट को अधिक से अधिक 10 लाख रुपये तक की मदद की जाएगी. इसके साथ, स्टेट या रीजनल लेवल पर 50 फीसदी सब्सिडी के साथ छोटे उद्योगों और समूहों के लिए ब्रांड विकसित करना चाहते हैं तो मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए भी सहायता दी जाएगी. वहीं अगर आप स्वयं सहायता समूह चलाना चाहते हैं तो सरकार की तरफ से 40 हजार रुपये प्राप्त कर सकते हैं.

ऐसे करना होगा ऑनलाइन आवेदन

PBNS की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप इस स्कीम का लाभ लेना चाहते हैं तो इसके लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स एफएमई के पोर्टल (https://pmfme.mofpi.gov.in/pmfme/#/Login) पर जाना होगा. यहां जाकर आप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. इसके बाद तमाम जानकारियां भरते हुए और प्लान शेयर करते हुए आप आवेदन कर सकते हैं.

बता दें कि लोगों की सहूलियत के लिए मिनिस्ट्री की तरफ से हर जिले में रिसोर्स पर्सन बनाए गए हैं, जो यूनिट्स के लिए डीपीआर तैयार करते हैं. साथ ही बैंक से लोन लेने, FSSAI स्टैंडर्ड को पूरा करने और रजिस्ट्रेशन कराने के बारे में सभी जानकारी आप इनसे ले सकते हैं. जिन्हें यूनिट्स लगाना है, वे अपना डीपीआर आवेदन सहित राज्य के नोडल अधिकारी को भेज सकते हैं.

आवेदन के बाद सरकार की तरफ से इसकी जांच होगी और फिर योजना की रकम सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाएगी. एक और खास बात यह कि आप अगर इस काम के लिए लोन लेते हैं तो निर्देशों के अनुसार, उस पर भी कुछ छूट दी जाती है और कोई ब्याज भी नहीं लगता.

10 हजार करोड़ रुपये का फंड

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अनुसार, पीएम-एफएमई स्कीम के तहत सरकार की योजना है कि वह 2020 से 2025 के 5 वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करें. इस पूरे खर्च में 60 फीसदी भागीदारी केंद्र की और 40 फीसदी राज्यों की होगी. केंद्र शासित प्रदेशों में भी 60:40 के अनुपात में हिस्सेदारी होगी. वहीं पूर्वोत्‍तर और हिमालय के आसपास के राज्यों में केंद्र सरकार 90 फीसदी और राज्य सरकार 10 खर्च करेंगी.

74 फीसदी लोगों को रोजगार

फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्रालय के अनुसार, देश में फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी करीब 25 लाख कंपनियां मौजूद हैं और इस सेक्टर से 74 परसेंट लोगों को रोजगार मिलता है. इनमें 66 फीसदी यूनिट्स ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और लगभग 80 फीसदी यूनिट्स परिवारों द्वारा चलाई जाती हैं. बता दें कि अब तक देश के 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना लागू की जा चुकी है. आप भी इस बारे में जानकारी लेकर अप्लाई कर सकते हैं.

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