Friday, November 27, 2020
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देश में कोरोना की Covaxin का ट्रायल हुआ शुरू, इन स्तरों पर होगी जांच

देश दुनिया में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच आए दिन कोई न कोई देश कोरोना की वैक्सीन के सफल होने की बात कर रहा है, तो कोइ अब भी ट्रायल कर रहा है। इसी दौड़ में अब हमारा देश भारत भी शामिल हो गया है। आज यानी 20 जुलाई 2020 को कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ का ट्रायल दिल्ली के एम्स अस्पताल में किया गया है (Indian Corona Covaxin Trial Start)। एम्स दिल्ली, देश के उन 14 इंस्टीट्यूट में से एक है, जिसे आईसीएमआर ने पहले और दूसरे चरण के ट्रायल की अनुमति दी थी। पहले चरण में वैक्सीन का ट्रायल 375 वॉलेंटियर पर किया जाना था, जिनमें से 100 का दिल्ली के एम्स अस्पताल में किया गया है। 

Indian Corona Covaxin Trial Start

Indian Corona Covaxin Trial Start

आपको बता दें इस Covaxin को दिल्ली में 18-55 साल के उन लोगो पर ट्रायल किया गया है, जिन्हे किसी भी तरह की कोई गंभीर बीमारी नहीं है। इसमें कुल 1125 सैंपल लिए जाएंगे, जिनमें पहले फेज में 375 सैम्पल लिए जाएंगे, वही दूसरे फेज में 12से 65 वर्ष की उम्र में 750 लोगों को शामिल किया जाएगा(Indian Corona Covaxin Trial Start)।

एम्स के एथिक्स कमेटी ने जैसे ही इसके ह्यमून ट्रायल के लिए रजिस्ट्रेशन कराना शुरू करवाया, इसके महज 10 घंटों में ही 10 हजार से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा डाला। हालांकि इन सभी लोगों में से प्राथमिकता दिल्ली एनसीआर के लोगों को ही दी गई है। 

पहले जानवरों पर की गई ट्रायल

जब से भारतीय कंपनी बायोटेक ने कोवैक्सीन के नाम का ऐलान किया था। तबसे लेक अब तक लोगों के जहन में एक ही सवाल था, कि वैक्सीन कब आएगी। आपको बता दें यह वैक्सीन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने किया है। इसमें में पूणे के वैज्ञानिक भी भारत के बायोटेक के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वैक्सीन के ट्रायल को लेकर आईसीएमआर के पूर्व वैज्ञानिक डॉक्टर  रमन आर गांखेडकर का कहना है कि कोवैक्सीन को जानवरों पर ट्रायल हो चुका है और इसके बाद ही यह ह्यमून्स पर इसका ट्रायल किया जा रहा है।

इस तरह किया जाता है वैक्सी का ट्रायल 

  • पहले स्टेज में देखा जाएगा कि क्या वैक्सीन सुरक्षित है, या इसमें कुछ गड़ बड़ है। इसी दौरान यह भी देखा जाएगा। की वैक्सीन लेने वाले के शरीर में एंटी बॉडी  सेल्स बन रहे हैं या नहीं।
  • दूसरी स्टेज में यह देखा जाता है कि कही वैक्सीन का कोई साइडइफेक्ट तो नहीं है। इसके लिेए आम तौर पर 6 महीने या एक साल तक ट्रायल किए गए व्यक्ति पर देखा जाता है।
  • तीसरी इस स्टेज में यह देखा जाता है कि कितने लोगों को नए सिरे से यह बीमारी होती है या नहीं।
  • चौथी स्टेज की प्रक्रिया ट्रायल मोड में नहीं होती। इसमें आम लोगों को जब वैक्सीन देना शुरू करते हैं तो देखा जाता है कि अगले दो साल तक कोई साइड इफेक्ट तो नही आए है। इस चरण को मार्केटिंग सर्विलांस भी कहा जाता है। इसी चरण के बाद वैक्सीन पर निर्णया लिया जाता है। 

देश के इन अस्पतालों में चल रहा है ट्रायल

वैक्सीन के ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने देश में 12 हॉस्पिटल्स का चयन किया है। इनमें एम्स-दिल्ली, एम्स पटना, किंग जॉर्ज हॉस्पिटल-विशाखापटनम, पीजीआई-रोहतक, जीवन रेखा हॉस्पिटल-बेलगम, गिलुरकर मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल-नागपुर, राना हॉस्पिटल-गोरखपुर, एसआरएम हॉस्पिटल-चेन्नई, निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज-हैदराबाद, कलिंगा हॉस्पिटल-भुवनेश्वर, प्रखर हॉस्पिटल-कानपुर और गोवा का एक हॉस्पिटल भी शामिल है।

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