Friday, October 15, 2021
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सेना ने ऐसे परखी डेडिकेट फ्रेट कॉरिडोर की क्षमता, ट्रायल रन में पटरी पर दौड़ी टैंक से लदी मालगाड़ी | Indian Army successfully conducts trial run of Military train loaded with vehicles and equipment on dedicated freight corridor

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सेना पिछले कई वर्षों से टैंक, तोप और ऐसे साजो-सामान को बॉर्डर तक ट्रांसपोर्ट करने के लिए रेलवे की मदद लेती आई है. इसलिए जब इस डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ तो सेना को प्राथमिकता दी गई.

यह ट्रायल सेना के लिए कारगर साबित हुआ है.

चीन और पाकिस्‍तान के साथ जारी तनाव के बीच ही भारतीय सेना ने सोमवार को एक नई उपलब्धि हासिल की है. सेना ने डेडेकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पर मिलिट्री ट्रेन का सफलतापूर्वक ट्रायल रेन किया. इस ट्रायल की खासियत थी कि इस पर टैंक, गाड़‍ियां और दूसरा साजो-सामान लदा हुआ था. सेना ने इस ट्रायल को हरियाणा के रेवाड़ी से राजस्‍थान के फुलेरा तक पूरा किया है. ये फ्रेट कॉरिडोर रेलवे की उसी मुहिम का हिस्‍सा है जिसका उद्घाटन कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था.

सोमवार को हुआ ट्रायल

सेना पिछले कई वर्षों से टैंक, तोप और ऐसे साजो-सामान को बॉर्डर तक ट्रांसपोर्ट करने के लिए रेलवे की मदद लेती आई है. इसलिए जब इस डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ तो सेना को प्राथमिकता दी गई. सेना के इस ट्रायल रन के साथ ही इस कॉरिडोर की क्षमता का भी परीक्षण हुआ और ये इस पर खरा उतरा है.

ये ट्रायल रन, सेना और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को-ऑपरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के बीच आपसी संपर्क और भारतीय रेलवे की सेनाओं के लिए बढ़ाई गई मोबिलिटी क्षमता का भी सबसे बड़ा उदाहरण है. ये ट्रायल रन ‘संपूर्ण देश’ वाली सोच के तहत अंजाम दिए गए जिसमें राष्‍ट्रीय संसाधनों को एक जगह करना और बिना रुकावट के मंत्रालयों और विभागों के बीच आपसी समायोजन को बढ़ावा देना है.

ट्रायल में पास हुआ कॉरिडोर

सेना की तरफ से कहा गया है कि इस तरह के कॉरिडोर से उपकरणों को तेजी से बॉर्डर पर तैनात करने में मदद मिलती है. रेलवे की एक मालगाड़ी में सेना की एक पूरी टैंक की स्क्‍वाड्रन जिसमें, 14 टैंक होते हैं, लोड किए जा सकते हैं. सेना के मुताबिक, रेलवे और डीएफसी लिमिटेड के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि सेना रोलिंग-स्टॉक (रॉल ऑन रॉल ऑफ सर्विस) से जुड़ा जहां-जहां भी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम रही है, उसे तेजी से पूरा किया जा सके. अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि सोमवार को दो ट्रायल्‍स किए गए हैं. पहला ट्रायल रेलवे के डिब्बों पर किया गया जबकि दूसरा ट्रायल आर्मी ट्रेन के डिब्बों पर किया गया. दोनों ही ट्रायल्‍स में भारी उपकरणों का प्रयोग किया गया था.

क्‍या होते हैं डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर

पीएम मोदी ने जनवरी माह में वेस्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्‍यू रेवाड़ी-न्यू मदार सेक्‍शन का उद्घाटन किया था. इस कॉरिडोर को 5,750 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है. इससे पहले उन्होंने 29 दिसंबर को ईस्‍टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के ‘न्यू खुर्जा-न्‍यू भाऊपुर’ सेक्शन का उद्घाटन किया था. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का मतलब ऐसी रेल लाइन से है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के लिए किया जाएगा. देश में ईस्टर्न और वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इनकी कुल लंबाई 3000 किलोमीटर है. इनका इस्तेमाल सिर्फ मालगाड़ियों के लिए होगा.

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Vertika
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