Friday, October 15, 2021
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क्या आप भी क्रेडिट कार्ड का मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं? डिटेल में जानिए इसका नुकसान | Know benefits and risk of paying the minimum amount due on your Credit Card

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Credit Card: जब आप सिर्फ मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं तो बाकी बिल का पैसा अगले महीने शिफ्ट हो जाता है. फिर उस पूरी राशि पर ब्याज लगता है. अगर आप फुल पेमेंट नहीं करते हैं तो हर महीने एक बड़ी राशि जमा होती जाती है. इन सभी बाकी के पैसे पर ब्याज जुड़ता है.

क्रेडिट कार्ड (सांकेतिक तस्वीर)

आपका क्रेडिट कार्ड का बिल आता है तो उसमें पैसे जुकाने का दो ऑप्शन होता है. या तो पूरे बिल का पेमेंट करें या मिनिमम बैलेंस चुकाकर आगे बढ़ जाएं. बिल में टोटल आउटस्टैंडिंग अमाउंट और मिनिमम अमाउंट ड्यू लिखा होता है. आप में से कई लोग मिनिमम अमाउंट चुकाते होंगे. ऐसा तब होता है जब पैसे की कमी होती है. आदमी सोचता है कि चलो अगले महीने दे देंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि इससे आप कई सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं. या यूं कहें कि मिनिमम अमाउंट चुकाने के फायदे बहुत कम मिलते हैं. कभी-कभी ऐसा करें तो बात समझ में आती है. लेकिन हमेशा ऐसा करते हैं तो क्रेडिट कार्ड का बिल बहुत ज्यादा हो जाएगा और आप कर्ज के जाम में फंस सकते हैं.

मिनिमम अमाउंट ड्यू क्या है

मिनिमम अमाउंट टोटल आउटस्टैंडिंग अमाउंट का 5 परसेंट हिस्सा होता है. अगर आपने कोई ईएमआई ली है तो वह भी मिनिमम अमाउंट में जुड़ जाता है. यह भी जान लें कि पिछला कोई भी पेमेंट बाकी हो, वह भी मिनिमम अमाउंट में जुड़ जाता है. हालांकि यह जानना चाहिए कि मिनिमम अमाउंट चुकाने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं.

मिनिमम अमाउंट चुकाने के फायदे

मिनिमम अमाउंट चुकाकर आप अपने क्रेडिट कार्ड को एक्टिव रख सकते हैं. यानी कि कार्ड अगर एक्टिव रहे तो उसमें टोटल एवलेबल क्रेडिट लिमिट का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसमें ईएमआई की राशि शामिल नहीं होती. आपकी कुल ईएमआई की राशि क्रेडिट कार्ड पर ब्लॉक हो जाती है. उससे बचा हुआ हिस्सा एवलेबल क्रेडिट लिमिट में आता है जिसे आप मिनिमन अमाउंट चुका कर इस्तेमाल करते रहते हैं. अगर आप मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं तो बैंक कभी भी आपके पेमेंट को डिफॉल्ट में नहीं डालेगा. इससे आपका क्रेडिट रिकॉर्ड सुधरा रहेगा. इससे आपके क्रेडिट स्कोर को सुरक्षा मिलती है. मिनिमम अमाउंट चुकाकर आप लेट पेमेंट फीस से भी बच जाते हैं.

मिनिमम अमाउंट चुकाने के नुकसान

जब आप सिर्फ मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं तो बाकी बिल का पैसा अगले महीने शिफ्ट हो जाता है. फिर उस पूरी राशि पर ब्याज लगता है. अगर आप फुल पेमेंट नहीं करते हैं तो हर महीने एक बड़ी राशि जमा होती जाती है. एक महीने का बचा बैलेंस अमाउंट दूसरे महीने के मिनिमम अमाउंट के साथ जुड़ता जाता है. इससे बिल की राशि लगातार बढ़ती जाती है. क्रेडिट कार्ड की ब्याज दर 35-40 परसेंट के हिसाब से वसूली जाती है जो आपके आउटस्टैंडिंग अमाउंट पर लगती है. अर्थात हर महीने जो पैसा आप नहीं चुकाते हैं उस पर ब्याज दर की गणना होती है.

क्रेडिट लिमिट घट जाती है

अब अगर मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं तो एक बड़ी राशि बिना चुकाए रह जाती है जिस पर 35-40 परसेंट के हिसाब से ब्याज लगता है. यह सालाना के स्तर पर होता है. क्रेडिट कार्ड से जिस दिन खरीदारी करते हैं, ब्याज उस दिन से जुड़ना शुरू हो जाता है, न कि बिलिंग साइकिल के अंतिम दिन से. इसलिए जब-जब आप मिनिमम अमाउंट चुकाते हैं, आप सिर्फ उतने ही रुपये के ब्याज से बच पाते हैं. ब्याज का एक बड़ा हिस्सा यूं ही छूट जाता है जिसे आप अगले महीने जोड़ कर देते हैं. इसके साथ ही आपको क्रेडिट फ्री पीरियड भी कम मिलता है. क्रेडिट कार्ड का बिल जितना कम चुकाएंगे, आपकी क्रेडिट लिमिट उतनी कम मिलेगी. इस वजह से आप अपने कार्ड से ज्यादा स्वैप नहीं कर पाएंगे.

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Vertika
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