Home news ‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए कंपनी से मिले पैसे पर कट गया टैक्स, जानिए रिफंड होगा या नहीं | Tax relief on Work from Home income know how reimbursements and allowances will be taxed

‘वर्क फ्रॉम होम’ के लिए कंपनी से मिले पैसे पर कट गया टैक्स, जानिए रिफंड होगा या नहीं | Tax relief on Work from Home income know how reimbursements and allowances will be taxed

by Vertika


टेलीफोन या मोबाइल का रिइंबर्समेंट टैक्स छूट के दायर में आएगा. ऑफिस के काम से घर में फर्नीचर आदि लगाते हैं तो उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. सेल्फ लर्निंग या खुद का कौशल बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग लेते हैं तो उस खर्च पर टैक्स क्लेम कर सकते हैं.

कंसल्टेंट अपने काम पर होने वाले खर्च को आईटीआर में दिखाकर उस पर डिडक्शन पा सकता है (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते वर्क फ्रॉम होम का कल्चर बढ़ गया है. फील्ड को छोड़ दें तो डेस्क से जुड़े अधिकांश काम अभी घर से हो रहे हैं. कंपनियां इसके लिए कई सुविधाएं दे रही हैं. ठीक-ठाक पैसा भी मिल रहा है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर उनकी कंपनी वर्क फ्रॉम के लिए पैसे दे रही है, तो उस पर टैक्स कट जाए तो उसे रिफंड कराने का कोई उपाय है या नहीं. अगर है तो उसके लिए क्या करना होगा.

इसे बारीकी से समझने के लिए पहले तो हमें यह जानना होगा कि कंपनी ने वर्क फ्रॉम के नाम पर किस मद में पैसा दिया है. नियम कहता है कि अगर कंपनी ने रिइंबर्समेंट दिया है लेकिन उसे सैलरी का हिस्सा मानते हुए दिया गया है तो टैक्स कटेगा. पैसा अगर सैलरी के मद में आता है तो वह टैक्स के दायरे में होता है. उसे लौटाने के लिए आपको अपनी इनकम देखनी होगी. अगर आप टैक्स स्लैब से बाहर हैं तो आईटीआर के बाद रिफंड करा सकते हैं. अन्यथा टैक्स स्लैब में हैं तो कर की अदायगी करनी होगी.

कंपनियों का अलग-अलग रूल

कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के दौरान इंटरनेट बिल, अखबार का खर्च, मोबाइल फोन का बिल आदि रिइंबर्समेंट के तौर पर दे रही हैं. अगर ऐसा कुछ रिइंबर्समेंट है तो उस पर टैक्स डिडक्शन का क्लेम कर पैसा बचा सकते हैं. लेकिन कंपनी ने अगर पैसे को सैलरी का हिस्सा बना कर दिया है तो टैक्स के जिस स्लैब में कर्मचारी आते हैं, उस आधार पर टैक्स चुकाना होगा. इस पर टैक्स तभी बच पाएगा अगर कर्मचारी उस कंपनी में कंसल्टेंट के तौर पर काम करता है. कर्मचारी का टैक्स सेक्शन 192 के स्लैब के मुताबिक कटता है जिस टैक्स के दायरे में वह आता है.

कंसल्टेंट के लिए खास नियम

अगर वही कर्मचारी कंसल्टेंट हो या रेगुलर न हो तो उसकी सैलरी पर 10 परसेंट का टीडीएस कटता है. कंसल्टेंट अपने काम पर होने वाले खर्च को आईटीआर में दिखाकर उस पर डिडक्शन पा सकता है. लेकिन रेगुलर कर्मचारी या कंपनी के इंपलॉई के लिए यह नियम लागू नहीं होता. आजकल कर्मचारी अपनी कंपनियों से कहते हैं कि वर्क फ्रॉम में अखबार, मोबाइल और इंटरनेट आदि का खर्चा बढ़ गया है. इसलिए सैलरी का कुछ हिस्सा इन खर्च के रिइंर्समेंट में दिया जाए ताकि उस पर टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सके. हालांकि कंपनियां की अपनी अलग-अलग पॉलिसी होती है जिसके आधार पर वर्क फ्रॉम का पैसा या तो सैलरी का हिस्सा बना कर दिया जाता है या रिइंबर्समेंट के रूप में.

सरकार देगी कुछ राहत?

कंपनियां तो कर्मचारियों के हाथ में पैसा सैलरी का हिस्सा बना कर दे देती हैं, लेकिन कर्मचारी को उस पर टैक्स चुकाना होता है. इससे कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है. इसकी वजह ये है कि सरकार ने अभी वर्क फ्रॉम होम को लेकर कोई टैक्स का नियम नहीं बनाया है. उम्मीद की जा रही है कि सरकार आने वाले समय में इसे कायदे-कानून के दायरे में लाएगी. विदेशी में इसका कानून पिछले साल ही बन गया था. वहां के लोग बैकडेट में टैक्स रिलीफ के लिए क्लेम करते हैं और उन्हें इसका फायदा मिलता है.

किस खर्च पर मिलता है डिस्काउंट

टेलीफोन या मोबाइल का रिइंबर्समेंट टैक्स छूट के दायर में आएगा. ऑफिस के काम से घर में फर्नीचर आदि लगाते हैं तो उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. सेल्फ लर्निंग या खुद का कौशल बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग लेते हैं तो उस खर्च पर टैक्स क्लेम कर सकते हैं. इसी तरह ऑफिस में इंटरनेट कंपनी के खर्चे पर लेते हैं लेकिन घर में अपने पैसे से इस्तेमाल करते हैं तो उस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं.

लीव ट्रेवल अलाउंस पर छूट है लेकिन ज्यादा से ज्यादा अलाउंस से तीन गुना तक ही खर्च करना होगा. अगर आप वर्क फ्रॉम होम में हाउस रेंट अलाउंस पर टैक्स छूट मांगते हैं तो नहीं मिलेगा क्योंकि अगर आपने किराये का घर छोड़कर अपने मकान में शिफ्ट कर लिया है तो टैक्स देना होगा. कनवेंस पर टैक्स डिडक्शन का क्लेम कर सकते हैं.

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