Friday, October 15, 2021
Home > news > Pre-EMI और Full-EMI के चक्कर में कई लोगों को हुआ है नुकसान, आप भी जान लें इनका मतलब? | Know Difference Between Pre EMI And Full EMi and how can you save money when you buy a house know all rules here
news

Pre-EMI और Full-EMI के चक्कर में कई लोगों को हुआ है नुकसान, आप भी जान लें इनका मतलब? | Know Difference Between Pre EMI And Full EMi and how can you save money when you buy a house know all rules here

Pre EMI और Full EMI के चक्कर में कई लोगों को हुआ

[ad_1]

अगर आप कोई ऐसा घर ले रहे हैं, जो अभी बन ही रहा है और आपने पहले उसका सौदा कर लिया है तो आपको प्री ईएमआई और फुल ईएमआई के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, ताकि आपको कोई मुश्किल ना हो.

प्री ईएमआई और फुल ईएमआई कंस्ट्रशन हो रहे मकान खरीदने पर काम आती है.

घर खरीदने का इच्छुक एक वर्ग फ्लैट खरीदना ज्यादा पसंद करता है. इसमें जिन लोगों को ज्यादा जरूरत नहीं होती है तो वो घर बनते वक्त ही उसमें पैसे निवेश कर देते हैं. इससे उस वक्त आपको फ्लैट काफी सस्ता पड़ता है और जब फ्लैट बनकर तैयार हो जाता है तब आप उसमें रहने चले जाते हैं. अगर आप भी ऐसा कुछ प्लान कर रहे हैं और पैसे लोन के जरिए दे रहे हैं तो
प्री-ईएमआई और फुल-ईएमआई की जानकारी होना आवश्यक है.

जब भी कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं और लोन के माध्यम से पेमेंट देना चाहते हैं तो आपको प्री-ईएमआई और फुल ईएमआई काफी काम आता है. ऐसे में आज हम आपको दोनों ईएमआई का मतलब बता रहे हैं और बता रहे हैं कि आपकी परिस्थिति के लिए कौनसी ईएमआई आपके लिए फायदेमंद हो सकती है.

क्या होती है ये प्री-ईएमआई?

जैसे मान लीजिए आपने कोई फ्लैट बुक कर लिया है और इसके लिए 50 लाख रुपये का लोन है. इसके साथ ही अभी आपका फ्लैट बन रही रहा है और रेडी टू मूव नहीं हुआ है और फिर भी लोन की ईएमआई आप दे रहे हैं तो इसे प्री-ईएमआई कहा जाएगा. होता क्या है कि जब तक कंस्ट्रक्शन जारी रहेगा, तब तक बैंक बिल्डर के पूरा पैसा नहीं देगा. इस स्थिति में आपके फ्लैट के निर्माण के हिसाब बैंक लोन के पैसे भी बिल्डर को देता रहता है. इस दौरान आप बिल्डर को ईएमआई के जरिये पार्शियल पेमेंट करते हैं. उसमें सिर्फ इंटरेस्ट शामिल होता है.

कैसे तय होती है ईएमआई?

Pre-EMI में हमेशा सिम्पल इंटरेस्ट लगता है. मान लीजिए आपने 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है. उसका पहला डिस्‍बर्समेंट 5 लाख रुपये और इंटरेस्ट रेट 7.5% है. यानी पजेशन मिलने से पहले बिल्डर को पहली किस्त के तौर पर 5 लाख रुपये मिले हैं. फिर जैसे जैसे बिल्डर को पैसे मिलते जाएंगे, आपकी ईएमआई भी बढ़ती जाएगी. अगर आप किराए के मकान में रहते हैं तो आपके लिए यह विकल्‍प अच्छा है. क्‍योंकि शुरुआत में आपकी ईएमआई कम रहती है. आपका इरादा इंवेस्टमेंट करने का है और पजेशन मिलने के बाद आप प्रॉपर्टी को बेचना चाहते है तो भी ये ऑप्शन अच्‍छा है.

क्या है फुल ईएमआई?

जब बिल्डर को थोड़ा थोड़ा पैसा मिलता है तो आपको प्रीईएमआई देनी होती है और पजेशन मिलने तक इसका भुगतान करते हैं. हालांकि, जब पूरा पेमेंट बिल्डर को मिल जाता है तो आपको फुल ईएमआई का भुगतान करना होता है, जिसमें इंट्रेस्ट और प्रिंसिपल दोनो शामिल है. जैसे जैसे कंस्ट्रक्शन होता जाएगा, बैंक बिल्डर को पैसे देती रहेगी. इस दौरान आप बिल्डर को ईएमआई के जरिये पार्शियल पेमेंट करते हैं. उसमें सिर्फ इंटरेस्ट शामिल होता है.

ये भी पढ़ें- क्रेडिट और डेबिट कार्ड के अलावा एक प्रीपेड कार्ड भी होता है, क्या आप जानते हैं? जानें- इसके बारे में सबकुछ

[ad_2]

Vertika
http://views24hours.com
Vertika is the lead writer on views24hours.com. With experience from top news agencies, she knows all about writing and explaining the stuff to readers. Keep reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *