Home news बाबा रामदेव की कंपनी रुचि सोया को SEBI से मिली बड़ी मंजूरी, शेयर में पैसा लगाने वालों पर होगा सीधा असर | Baba Ramdev Ruchi Soya share price has received SEBI approval to launch an FPO

बाबा रामदेव की कंपनी रुचि सोया को SEBI से मिली बड़ी मंजूरी, शेयर में पैसा लगाने वालों पर होगा सीधा असर | Baba Ramdev Ruchi Soya share price has received SEBI approval to launch an FPO

by Vertika

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साल 2019 में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने 4,350 करोड़ रुपये में रुचि सोया को खरीद लिया था. कंपनी तेल मिल, खाद्य तेल प्रसंस्करण और सोया प्रोडक्ट का कारोबार करती है.

रुचि सोया के एफपीओ यानी फोलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO-Follow-on Public Offer) को मंजूरी मिल गई है.

रुचि सोया को एफपीओ लाने की मंजूरी मिल गई है. शेयर बाजार रेग्युलेटर सेबी (SEBI-Securities and Exchange Board of India ) ने रुचि सोया के एफपीओ यानी फोलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO-Follow-on Public Offer) को मंजूरी दे दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की एफपीओ के जरिए 4300 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है.  इस खबर के बाद कंपनी के शेयर में जोरदार तेजी है. शेयर 3 फीसदी की बढ़त के साथ 1163 रुपये के भाव पर पहुंच गया है.

सबसे पहले जानते हैं आखिर एफपीओ होता क्या है?

FPO यानी फॉलोऑन पब्लिक ऑफर होता है. शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी रकम जुटाने के लिए FPO के जरिये सैकेंडरी मार्केट में नए शेयर जारी करती है. निवेशक IPO की तर्ज़ पर FPO के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. कंपनी FPO का प्राइस बैंड तय करती है और जारी होने वाले शेयरों की संख्या भी बताती है.  FPO एक निश्चित समयसीमा के लिए ही होता है. FPO के शेयर मिलने के बाद किसी तय तारीख से इन शेयरों की ख़रीद-फ़रोख्त शुरू होती है

FPO और ऑक्शन में क्या अंतर है, ऑक्शन के जरिये शेयर कैसे ख़रीदे जाते हैं?

बोली लगाकर शेयरों की ख़रीद-फ़रोख्त को ऑक्शन कहा जाता है. इस प्रक्रिया के तहत शेयरों की बिक्री एक निश्चित समयसीमा में होती है. प्रमोटर्स BSE, NSE पर ऑक्शन के जरिये हिस्सा बेच सकते हैं. मार्केट कैप के लिहाज से शीर्ष 100 कंपनियां ऑक्शन के जरिये हिस्सा बेच सकती हैं.

जिन कंपनियों में प्रमोटर्स हिस्सा 75% से अधिक है, वे ऑक्शन के जरिये हिस्सा बेच सकती हैं.कम से कम 25 करोड़ रुपये या पेड-अप कैपिटल का 1 फीसदी हिस्सा ऑक्शन के जरिये बेचने की शर्त है.

ऑक्शन के लिए कंपनी फ्लोर प्राइस यानी कम से कम बोली तय करती है. फ्लोर प्राइस से कम की बोली मान्य नहीं होती है. ऑक्शन एलॉटमेंट क्लीयरिंग प्राइस या प्रायरिटी के आधार पर होगी

ऑक्शन का फ़ायदा- ऑक्शन से कंपनी जल्द रकम जुटा सकती है.FPO के मुकाबले ऑक्शन में कंपनी को ज़्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है.

रुचि सोया का प्रदर्शन -(आंकड़े NSE से लिए गए है)

शेयर 1 महीना 3 महीने 1 साल 3 साल
प्रदर्शन 1 फीसदी 51 फीसदी 61 फीसदी 11354 फीसदी

रुचि सोया के बारे में जानिए

साल 2019 में पतंजलि आयुर्वेद ने 4,350 करोड़ रुपये में रुचि सोया का अधिग्रहण किया था. इस कंपनी को खरीदने की रेस में अडानी समूह भी शामिल था लेकिन बाद में पीछे हटने का फैसला लिया.

उस दौरान लोगों में इस बात को लेकर आशंका थी कि संकट का सामना कर रहे रुची सोया के कारोबार को किस तरह से रामदेव की कंपनी मुनाफे में बदलेगी. लेकिन बाद के दिनों में पतंजलि को रुची सोया से काफी मुनाफा प्राप्त हुआ.

बीते दिनों एक इंटरव्यु में बाबा रामदेव ने बताया था कि पतंजलि की तरफ से आईपीओ इस साल नहीं आएगा, लेकिन इसे लेकर इस वित्त वर्ष के अंत तक कोई फैसला ले लिया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि रुचि सोया के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के सिलसिले में विभिन्न इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स से मिल रहे हैं.

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