Friday, September 24, 2021
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वित्‍त मंत्री निर्मला सीतामरण आज पेश करेंगी 6 लाख करोड़ रुपये का नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन प्रोग्राम, जानिए इससे क्या होगा अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर असर | National Monetisation Pipeline Programme NPP to be presented by Finance Minister Nirmala Sitharaman

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माना जा रहा है कि प्रोग्राम की मदद से सरकार 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है. इस कार्यक्रम को एसेट मॉनेटाइजेशन के तौर पर भी जाना जा रहा है.

इस प्रोग्राम के जरिए सरकार को कई लाख करोड़ रुपए जुुटाने की उम्‍मीद है.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण आज नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन प्रोग्राम (NMPP) को पेश करेंगी. जो खबरें आ रही हैं उसके मुताबिक इस प्रोग्राम के जरिए केंद्र सरकार सरकारी कंपनियों में विनिवेश के जरिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स को फंड करेगी. माना जा रहा है कि प्रोग्राम की मदद से सरकार की योजना 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की है. इस कार्यक्रम को एसेट मॉनेटाइजेशन के तौर पर भी जाना जा रहा है. वित्‍तीय मामलों के जानकारों की मानें तो केंद्र सरकार विनिवेशिकों को इस प्रोग्राम की मदद से किसी प्रोजेक्‍ट की एक साफ तस्‍वीर दे सकती है.

आज शाम होगा ऐलान

आज शाम 5 बजे इसका औपचारिक ऐलान होगा. इस वर्ष जब बजट पेश किया गया था तो इसका ऐलान किया गया था. एक डैशबोर्ड सिस्‍टम होगा जिसमें यह बताया जाएगा कि किस सेक्‍टर में एसेट को मॉनेटाइज करना है और इससे कितना पैसा आएगा. सूत्रों की मानें तो एसेट मॉनेटाइजेशन से सरकार 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है. सबसे ज्‍यादा मॉनेटाइजेशन हाइवे सेक्‍टर और रेलवे से होने की उम्‍मीदें हैं.

बेहतर होगा रखरखाव

आज शाम 5 बजे इसका औपचारिक ऐलान होगा. इस वर्ष जब बजट पेश किया गया था तो इसका ऐलान किया गया था. एक डैशबोर्ड सिस्‍टम होगा जिसमें यह बताया जाएगा कि किस सेक्‍टर में एसेट को मॉनेटाइज करना है और इससे कितना पैसा आएगा. सूत्रों की मानें तो एसेट मॉनेटाइजेशन से सरकार 6 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है.

सबसे ज्‍यादा मॉनेटाइजेशन हाइवे सेक्‍टर और रेलवे से होने की उम्‍मीदें हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2021-22 के बजट भाषण में कहा था कि नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए एसेट मॉनेटाइजेशन को एक बहुत महत्वपूर्ण वित्त-पोषण विकल्प बताया था. सरकार, संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन को केवल सिर्फ फंडिंग का जरिया ही नहीं बल्कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स के रखरखाव और विस्तार की बेहतर रणनीति के तौर पर देख रही है.

सरकार ने चुने कौन-कौन से सेक्‍टर

26,700 किलोमीटर लंबे नेशनल हाइवे के जरिए सरकार को 1.6 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्‍मीद है. इसके बाद रेलवे के 400 स्‍टेशनों, 150 ट्रेनों और रेलवे ट्रैक्‍स और वुडशेड्स के जरिए सरकार के हिस्‍से 1.5 लाख करोड़ रुपए आने की संभावना है. इसके अलावा पावर सेक्‍टर से 0.67 लाख करोड़ जिसमें 42,300 सर्किट किलोमीटर के ट्रांसमिशन का एसेट मॉनेटाइजेशन, गैस पाइपलाइन 0.24 लाख करोड़, टेलीकॉम से 0.39 लाख करोड़ रुपए, वेयरहाउसिंग से 0.29 लाख करोड़, माइनिंग से 0.32 लाख करोड़, एयरपोर्ट्स से 0.21 लाख करोड़ रुपए, बंदरगाह के एसेट मॉनेटाइजेशन से 0.13 लाख करोड़ रुपए और स्‍टेडियम्‍स के मॉनेटाइजेशन से 0.11 लाख करोड़ रुपए आने की उम्‍मीद है. सरकार ने देश के दो राष्‍ट्रीय स्‍टेडियमों का मॉनेटाइजेशन करने की योजना बनाई हैं.

क्या होता है विनिवेश

सरकारी कंपनियों (PSU) में सरकार की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया विनिवेश या डिसइन्वेस्टमेंट (Dis-investment) कहलाती है. कई कंपनियों में सरकार की काफी हिस्सेदारी है. आम तौर पर इन कंपनियों को सावर्जनिक उपक्रम या पीएसयू कहते हैं.

सरकार के लिए विनिवेश वास्तव में पैसे जुटाने का महत्वपूर्ण जरिया है. शेयर बाजार में अपने हिस्से के शेयर की बिक्री का ऑफर जारी कर सरकार खुदरा और संस्थागत निवेशकों (इसमें विदेशी निवेशक भी शामिल होते है) को उस PSU में निवेश करने के लिए आमंत्रित करती है.

विनिवेश की इस प्रक्रिया के जरिए सरकार अपने शेयर बेचकर संबंधित कंपनी (PSU) में अपना मालिकाना हक घटा देती है. विनिवेश की इस प्रक्रिया से सरकार को दूसरी योजनाओं पर खर्च करने के लिए धन मिलता है.

किसी PSU में विनिवेश प्रक्रिया का एक उद्देश्य उस कंपनी का बेहतर प्रबंधन भी होता है. वास्तव में सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) की कंपनियां सिर्फ मुनाफे को ध्यान में रखकर काम नहीं करती, इसलिए कई बार उनके कामकाज में ज्यादा मुनाफा नहीं होता.

किसी PSU में विनिवेश या तो किसी निजी कंपनी के हाथ शेयर बेचकर किया जा सकता है या फिर उनके शेयर आम लोगों को खरीदने के लिए जारी किए जा सकते हैं. कई बार लोग विनिवेश का मतलब किसी सरकारी कंपनी का निजीकरण समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है.

निजीकरण और विनिवेश में अंतर है. अगर किसी PSU का निजीकरण किया जा रहा है तो उसमें सरकार अपनी 51% से अधिक हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेच देती है. विनिवेश या डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment) की प्रक्रिया में सरकार अपना कुछ हिस्सा बेच देती है, लेकिन PSU में उसका मालिकाना हक बना रहता है.

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Vertika
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