Home news पत्नी की किसी प्रॉपर्टी या ब्याज की कमाई में हिस्सा नहीं ले सकता पति! जानिए क्या कहते हैं MWP एक्ट के नियम | Married womens protection act nwp act husband can not acquire any interest in saving property investment of wife

पत्नी की किसी प्रॉपर्टी या ब्याज की कमाई में हिस्सा नहीं ले सकता पति! जानिए क्या कहते हैं MWP एक्ट के नियम | Married womens protection act nwp act husband can not acquire any interest in saving property investment of wife

by Vertika

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एक्ट के मुताबिक अगर पति अपनी पत्नी और बच्चों को डेथ बेनेफिट के लिए नॉमिनी तय कर देता है तो बाद में इस पर कोई दावा नहीं ठोक सकता. यहां तक कि माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों का भी कोई अधिकार नहीं बनता.

NWP Act में महिलाओं के मिलते हैं कई अधिकार (सांकेतिक तस्‍वीर)

मैरिड वुमेन्स प्रोटेक्शन एक्ट (MWP act) विवाहित महिलाओं की रक्षा के लिए बनाया गया है. यह एक तरह से वेलफेयर या कल्याणकारी कानून है जिसमें महिलाओं के सामाजिक कल्याण से जुड़े अधिकारों का जिक्र है. MWP act सन् 1874 में बनाया गया था. इस कानून का मकसद सैलरी, कमाई, प्रॉपर्टी, निवेश और सेविंग का मालिकाना हक विवाहित महिलाओं को देना है. पत्नी की ऐसी किसी भी कमाई या निवेश पर पति का हक नहीं बनता.

MWP act के मुताबिक, पत्नी अगर निवेश, सेविंग, सैलरी या प्रॉपर्टी से किसी तरह का ब्याज पाती है, ब्याज से उसकी कमाई होती है तो पति उसमें हिस्सेदारी नहीं ले सकता. यह नियम इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया कि शादी से पहले महिला को अपने परिवार से कोई प्रॉपर्टी मिलती है तो उसके मालिकाना हक की रक्षा हो सके. महिला को अपने परिजन, रिश्तेदार या क्रेडिटर्स से संपत्ति मिली है और उस पर ब्याज आदि की कमाई होती है तो उस पर पूरा हक शादी के बाद भी उसी का होगा. पति इस पर दावा नहीं कर सकता. यह बात अलग है कि पत्नी अपनी इच्छा से ब्याज की कमाई में पति को हिस्सेदारी दे दे.

MWP act की धारा 6

MWP act की धारा 6 कहती है कि पति अगर कोई इंश्योरेंस पॉलिसी लेता है और उसमें पत्नी और बच्चों को बेनेफिशयरी बनाता है तो पॉलिसी का पूरा डेथ बेनिफिट या बोनस पत्नी और बच्चों को ही दिया जाएगा. इसमें पति के परिवार के किसी सदस्य की हिस्सेदारी नहीं हो सकती. यानी पति की मृत्यु के बाद इंश्योरेंस पॉलिसी से जुड़े सभी वित्तीय लाभ का अधिकार पत्नी और बच्चों को दिए जाते हैं.

पति अगर पत्नी और बच्चों के नाम इंश्योरेंस पॉलिसी लेता है तो जाहिर सी बात है कि उसके बेनेफिशयरी के रूप में ये ही दोनों कानूनी वारिस होंगे. इसके बावजूद पॉलिसी में पत्नी को नॉमिनी के रूप में दर्ज करना होता है. कानूनी रूप से यह काम वैध और जरूरी है. बाद में इसमें कोई कानूनी अड़चन पैदा नहीं होती और पत्नी और बच्चे स्वाभाविक नॉमिनी निर्धारित होते हैं.

इंश्योरेंस पॉलिसी का अधिकार

MWP act के तहत इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के कुछ खास प्रावधान बनाए गए हैं. इस एक्ट के तहत पति अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पॉलिसी लेता है और उसकी मृत्यु के बाद पॉलिसी के सभी फायदे पत्नी-बच्चों के दिए जाते हैं ताकि विपरीत परिस्थितियों में परिवार को कर्ज का बोझ न झेलना पड़े. डेथ बेनिफिट और बोनस आदि के पैसे से परिवार का खर्च चल सके, इसके लिए एनडब्ल्यूपी एक्ट में ये प्रावधान किए गए हैं.

नॉमिनी को वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं. साल 2015 में इंश्योरेंस के नियमों में बदलाव कर ‘बेनेफिशियल नॉमिनी’ का विकल्प दिया गया जिसमें पॉलिसीहोल्डर नॉमिनी के तौर पर पत्नी (या पति), माता-पिता और बच्चों के नाम दर्ज कर सकता है. इसी नाम के आधार पर इंश्योरेंस का फायदा दिया जाता है. इसके तहत पॉलिसीहोल्डर चाहे तो कई लोगों को नॉमिनी बना सकता है और चाहे तो सबके लिए पहले से शेयर तय कर सकता है.

डेथ बेनिफिट पर किसका अधिकार

एक्ट के मुताबिक अगर पति अपनी पत्नी और बच्चों को डेथ बेनेफिट के लिए नॉमिनी तय कर देता है तो बाद में इस पर कोई दावा नहीं ठोक सकता. यहां तक कि माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों का भी कोई अधिकार नहीं बनता. पति को एक अधिकार यह मिलता है कि पॉलिसी के दौरान वह चाहे तो नॉमिनी का नाम बदल सकता है. तलाक या अन्य किसी विवाद की स्थिति में पति जिसका नाम नॉमिनी के रूप में दर्ज कर दे, उसे ही डेथ बेनिफिट का लाभ मिलेगा. सबसे अंत में जिस नॉमिनी के नाम में सुधार किया जाता है, उसे ही बेनिफिट या बोनस का लाभ मिलता है.

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